खत्म हो जाते हैं डॉक्टर आपको भूल भुलैया में रखते हैं की 6 महीने में ठीक हो जाओगे 8 महीने में ठीक हो जाओगे। जब लोग कीमोथेरेपी कराते हैं तो उनके बाल उड़ जाते हैं। रिश्तेदार भी फोर्स करते हैं कि पीजीआई ले जाओ ऐम्स चले जाओ इत्यादि उनका मकसद खराब नहीं होता। अब थोड़ी प्रिवेंशन की बात करते हैं। इसके लिए एक जड़ी-बूटी आती है" गनोडरमा" उसमें हल्दी मिलाकर सेवन करें ।गैनोडर्मा दवाई नहीं है। यह हाई थैरा पैटिक वैल्यू वाला फूड है पर जिंदगी में कैंसर ना आए हमें इस पर काम करना है तो सबसे पहले खाने का तेल बदलिए। डालडा रिफाइंड बिल्कुल भी इस्तेमाल ना करें ।इसके साथ ही छिलके वाली दाल ,चावल, सब्जियां इत्यादि इस्तेमाल करें शरीर में कोई भी रोग आना यह बताता है की चेंज युवर फूड (अपना भोजन बदलिए।)
कैंसर के कारण: पेस्टिसाइड्स वाला अनाज सब्जियां इत्यादि तथा तंबाकू बीड़ी गुटखा इत्यादि।
बचाव के उपाय: इससे बचाव ही इसका उपाय है। महिलाओं में दिक्कतें ज्यादा आती हैं ।पहले गांठ बनती है, उसके बाद ट्यूमर सभी गांठें कैंसर नहीं होती दो या तीन प्रतिशत ही कैंसर हो पाते हैं। इसके लिए पान के साथ खाए जाने वाला चूना दही में डालकर चाय में डालकर वह भी डीएक्सएन चाय में डालकर कॉफी में डालकर पिए।
टेस्टिमोनियल: मेरे एक अंकल है उनको हम शेरगिल अंकल कहते हैं ।उनके गले में डॉक्टरों ने कैंसर बताया शेरगिल अंकल पीजीआई में कीमोथेरेपी डिपार्टमेंट में काम करते थे। रिटायरमेंट के बाद जब पीजीआई वालों ने उनके शरीर में कैंसर की पुष्टि की और डॉक्टर से शेरगिल जी अब आपको भी रेडिशन का सहारा लेना पड़ेगा। परंतु शेर गिल अंकल को डीएक्सएन गनोडरमा की पावर का पता था ।उन्होंने लेना शुरू किया कुछ नहीं महीनों बाद उनकी तबीयत में बहुत अच्छा सुधार आया ।फिर तो उन्होंने गुरुद्वारे मंदिर पब्लिक पार्क आदि में जाकर लोगों को होप देने का काम किया सारी महिमा वह उस परवरदिगार को देते हैं।


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