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जीभ चिकित्सा निदान


जीभ चिकित्सा निदान
जीभ के अगले सिरे पर मिठास पिछले सेरे पर कड़वापन तथा जीभ के दोनों किनारों पर खट्टेपन का पता चलता है।
 किसी भी तरह का स्वाद अनुभव करने के लिए जीभ का गीला रहना अत्यंत जरूरी है।

 सुखी  जीभ किसी भी तरह का स्वाद बताने में असमर्थ होती है जीभ के बिना कोई भी व्यक्ति बोल नहीं सकता।
 सफेद जीभ कफ बढ़ने का संकेत देती है।
जीभ का पीलापन शरीर में खून की कमी को दर्शाता है।
 दिल की बीमारी वाले व्यक्तियों की जीभ नीली पड़ने लगती है।
 पेट में कीड़े होने पर जीभ पर काले रंग के दाने दाने से जाते हैं।
 जीभ का रंग यदि ज्यादा लाल हो तो पित्त बढ़ने का संकेत है।
 दांतो का कोई भी रोग होने पर जीभ का पिछला भाग सफेद होने लगता है।
 जीभ का दानेदार होना पाचन शक्ति खराब होने का संकेत है।
 जीभ फटने पर कोलाइटिस होने का संकेत है।
 बुखार होने पर जीभ का रंग सफेद हो जाता है और इस पर लाल दाने भी दिखाई देते हैं।
 खून में खराबी आने पर तथा सुजाक रोग होने पर जीभ पर घाव होने लगते हैं।
 पेनक्रियाज  के रोग आने पर जीभ थोड़ी सी बढ़ जाती है।
 जीभ का स्थिर होना दिमाग में कमजोरी दर्शाता है।
जीभ के ज्यादा गीला होना पर पेट में छाले या ट्यूमर या आंतों की खराबी अंकित करता है।
 टाइफाइड बुखार होने पर  जीभ हल्की काली या  भूरी हो जाती है।



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