सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

The obesity: MEANS OVERWEIGHT



Obesity is overweight of a person.He/she may be of any  age groups and having  lot of body fat.
 A person can be obese when there is imbalance is created between pituitary gland and thyroid gland.
 By which  Body Components work inconsistently.Because fat takes its place and reduces
 the power of transmission of nutrients from food .as fat  reduces Turbidity  of inner parts of body.
 by which person life become less.His life  is surrounded by lots of diseases like constipation,heart diseases,high B.P
 skin diseases.in case of  female their uterus get fill with fat.Such females are unable to give birth to child or say 
 unable to be pregnant.
Root cause of  obesity:-lethargic life,no work hard,less body alkaline level,more sleeping,more and  more eating .
 
Food:-the peoples who intake alkaline food like Spiriluna, raw vegetables and  do exercise regularly they always remain safe from obesity.We have to reduce obesity slowly and slowly. 
·         HONEY WATER DRINK HELPS TO REDUCES OBESITY.
·         FRUIT JUICE INTAKE ALSO HELP TO REDUCES OBESITY
·         OBESE PERSON IF EAT HONEY AND BREAD SYSTEMATICALLY THIS HELPS THEM TO REDUCE WEIGHT.
Take 6 Banana and without fat milk till 15 days.After that you  may reduce 2 banana  and replace by 2 other fruits.or  brain bread .You may apply this tips till weight is not reduce.
 
Drink TRIFLA churna kadha(Tea) with  honey helps to weight loss.
Some of our experiences with  Dxn Ganoderma in weight loss.
 
Dxn Gano Tea
Dxn 2in 1 coffee/
ninizhi juice/
Roselle juice/
Dxn Spirulina
 
These are some of Dxn products which are helps us weight loss
.Actually these products increases our metabolism
.By which  Vital forces of our body get increases.
.
 
 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एलर्जिक राइनाइटिस

जुकाम से अलग है एलर्जिक राइनाइटिस, अस्थमा से लेकर सूंघना हो सकता है बंद । एलर्जिक राइनाइटिस , एलर्जन की वजह से होती है जबकि साधारण सर्दी-जुकाम वायरस या संक्रमण के कारण । एलर्जिक राइनाइटिस , एलर्जन की वजह से होती है जबकि साधारण सर्दी-जुकाम वायरस या संक्रमण के कारण। एलर्जिक राइनाइटिस क्या है। इसके क्या लक्षण हैं? यह नाक से जुड़ी एक आम समस्या है। जिसमें अतिसंवेदनशीलता के कारण कुछ कोशिकाओं के अतिसक्रिय होने पर जुकाम के रूप में नाक पर प्रभाव पडऩे लगता है। फलस्वरूप लगातार छींके , नाक से पानी, नाक व आंख में खुजली रहना जैसे लक्षण होने लगते हैं। कौन-कौन से कारक इस तकलीफ को बढ़ाते हैं? सबसे ज्यादा धूल, धुआं, सर्दी, डस्टमाइट्स और पौधों के परागकणों आदि की वजह से एलर्जी हो सकती है। इनके अलावा सॉफ्ट टॉयज, पालतू जानवर, कॉक्रोच, फंगस, दवा विशेष या किसी खाद्य सामग्री से भी एलर्जी हो सकती है। एलर्जिक राइनाइटिस और सर्दी-जुकाम में क्या अंतर है? एलर्जिक राइनाइटिस, एलर्जन की वजह से होती है जबकि साधारण सर्दी-जुकाम वायरस या संक्रमण के कारण। एलर्जिक राइनाइटिस में लगातार छींके आना, आंख व नाक में खुजली...

मोटापे पर चर्चा

इस एनीमेशन में, हम शारीरिक गतिविधि और व्यायाम की अवधारणा पर चर्चा करते हैं क्योंकि वे मोटापे से संबंधित हैं। मनुष्यों में ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा व्यय के बीच एक अच्छा संतुलन है। ऊर्जा का सेवन भोजन के रूप में होता है, और ऊर्जा व्यय बेसल चयापचय दर और शारीरिक गतिविधि के रूप में होता है। ऊर्जा सेवन और ऊर्जा व्यय के बीच का अंतर शुद्ध ऊर्जा संतुलन है। यदि सेवन व्यय से अधिक है, तो शुद्ध सकारात्मक ऊर्जा संतुलन होता है। ऊर्जा व्यय कई कारकों पर निर्भर करता है। इसमें शुरुआती शरीर का वजन, बेसल चयापचय दर और शारीरिक गतिविधि शामिल है। शारीरिक गतिविधि के संबंध में, आवृत्ति, तीव्रता, अवधि और प्रकार की गतिविधि सहित कई प्रमुख चर हैं। आइए अब हम ऊर्जा की खपत की जांच करें। एक शहद का घुटा हुआ डोनट दिखाया गया है जिसमें लगभग 300 किलोकलरीज हैं। भस्म किए गए डोनट से ऊर्जा की खपत 30-60 मिनट के लिए मध्यम चलने से खपत ऊर्जा के बराबर है, 3.0 मील प्रति घंटे की दर से। यदि कोई व्यक्ति एक घंटे के लिए 3 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलता है। वे लगभग 300 किलोकलरीज का खर्च करेंगे, वही जो उपभोग किए गए डोनट में निहित था। यद...

ल्यूकोडर्मा

व्हाट्स पैच मूल रूप से एक त्वचा रोग है। यह  त्वचा को ही नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक रूप से भी एक व्यक्ति को हीन करता है। यह एक मरीज को उदास और कमजोर महसूस कराता है। ल्यूकोडर्मा एक अंग्रेजी शब्द है, ल्यूको का अर्थ है सफेद और डर्मा का अर्थ है त्वचा। त्वचा पर कोई भी सामान्य सफेद पैच जो संक्रमण या सूरज के संपर्क में आने के कारण हो सकता है, उसे ल्यूकोडर्मा कहा जाता है। इसे हाइपर पिगमेंटेशन के रूप में भी जाना जाता है। जबकि विटिलिगो में, एक व्यक्ति त्वचा पर कई सफेद पैच से पीड़ित होता है और यह शरीर में मेलेनिन के उत्पादन में कमी के कारण होता है। मेलानोसाइट्स मेलेनिन का उत्पादन करने में असमर्थ हैं और विटिलिगो में असमान त्वचा टोन का परिणाम है। विटिलिगो एक वंशानुगत बीमारी है और तनाव, मधुमेह और थायराइड से पीड़ित रोगियों में हो सकती है। सफेद पैच आमतौर पर संक्रमण के कारण बच्चों में होते हैं और गाल क्षेत्र पर दिखाई देते हैं। विटिलिगो पैच ग्लोबिलर, होंठ और नासोलैबियल फोल्ड्स क्षेत्र पर होते हैं। विटिलिगो के पैच सामान्यीकृत या स्थानीयकृत होते हैं। सामान्यीकृत पैच पूरे शरीर में होते हैं जबकि स्था...